‘देश के कोने-कोने से गाड़ियों में भर-भरकर लोग उस धाम को जाने लगे थे---।’
‘उस देश का नाम क्या है?’ जो मुझसे पहली मर्तबा यह कहानी सुन रहा था, उसका ही पहला प्रश्न था यह।
‘नाम में क्या रखा है! दुनिया भर में कोई जगह है, जहां धूल-धक्कड़, टिब्बे-टीले, उजड़ या सरसब्ज इलाके, मंदिर-मस्जिद-गिरजा, समाधियां-मजार या फिर आसमां लीलतीं इमारतें और चींटियों के बांबियों में समा जाने भर ....
