संजय मनहरण सिंह

 अंधेरे के रंग में डूबा पेंटर  

एक्रेलिक रंगों की महक से कमरा भरा हुआ था। खिड़की के पास जो टेबल बरसों से उदास पड़ा हुआ था, उस पर ढेरों रंग-बिरंगे खाली पिचके ट्यूब बिखरे पडे़ थे। एक मग में ब्रश औंधे पडे़ थे। वह खुद भी बिस्तर पर देर से पड़ा हुआ था। बहुत सुबह उस बिस्तर पर नींद की छोटी किस्त उतरी थी। लेकिन अब वह नींद में नहीं था। वह अपनी सोच में था।
देर रात वह बल्ब बंद करना भूल गया था, जो अभी जल रहा था। उसकी रोशनी ....

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