संदीप अवस्थी

कौन ठगवा नगरिया लुटल बा

आजकल ठगी करना आसान नहीं है। जब से तकनीक खुद ठग बन गई और किस्मत पैदल चल रही तब से ठगी करना आसान नहीं। वरना पहले बड़ा आसान था, यह सोने की ईंट, चूड़ियां ले लो कौड़ियों के दाम। औरतें कम आदमी झांसे में तुरंत। उसे ईंट दिखाई जाती कायदे से सिर पर मारनी चाहिए। उस वक्त की बीस लाख की ईंट स्पेशल जरूरत में वह मात्र एक लाख में दे रहा। घर में इतने न निकले तो यार दोस्तों से उधार पूछा भी तो कोई न दि....

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