पवन माथुर

ग्रे-एरिया

आंख के अस्पताल के सामने पहुंच वे थोड़ा रुक गए, उन्हें लगा इसकी तो कायापलट ही हो चुकी है। तीन दशक पहले जब उन्होंने अपने पिता को यहां मोतिया-बिंद के लिए दिखाया था, तब यह लाल-पीले रंग से पुती हुई दो मंजिला इमारत थी, और अब, काले शीशों से मढ़ी हुई यह सात-मंजिला इमारत न जाने क्यों लगा कि उन्हें ही घूर रही थी। वे जैसे ही पांच-सात सीढ़ियां चढ़कर मेन-दरवाजे़ के सामने पहुंचे, दरवाजा अपने आप ....

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