पंकज शर्मा

असाधारण चरित्रों की निर्मिति-3   (उमा शंकर चौधरी की कहानियां) 

सुनानी जिस झोपड़पट्टी में परिवार के साथ सालों साल रहा, सरकारी फरमान ने एक ही झटके में विस्थापित कर दिया। जब मालूम चलता है कि सरकार झुग्गी के बदले पक्का मकान दे रही है, उसे यह सोचकर सुकून मिलता है कि अब बेटी को नहाते वक्त आसपास के लफंगे लड़के ताक-झांककर देख नहीं पाएंगे। एक पिता के लिए इससे अधिक बेबसी और क्या ही हो सकती है कि वह अपनी जवान बेटी को नहाते वक्त लफंगे लड़कों की नजरों ....

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