हमारा समय बंजर होता जा रहा है, कारों की खेती के बावजूद। कविता पर अपने समय को दर्ज करने की जिम्मेदारी है। आज की हिंदी कविता एक बहुवचन संज्ञा है। वह भारतीय मनुष्यता की विकासमान चेतना का प्रलेख है। एक गहरी आत्म-मीमांसा, जो बहुत लाउड नहीं है। इसमें अलक्षित और परित्यक्त समाजों की आवाज सुनाई देती है। कविता के मुहावरे बदल रहे हैं, कहानी के पात्र बदल रहे हैं। यद्यपि अरुण कमल के अ....
