बारिश लगातार तेज होती जा रही है। दो दिन पहले मंगवाए गए रैक पर किरण ने कपड़े फैला दिए हैं। बारिश के दौरान ही वह बार-बार बालकनी में जाती और बूंदों के साथ कुछ देर खेलने का उपक्रम करते हुए लौट आती है पर आंख भर बादलों से लदा आसमान देखने की चाहत उसके मन में ही रह जाती है। कड़कती बिजली से भीतर तक छुरछुरी-सी चल रही थी। मटमैली इमारतें झमाझम बारिश से साफ धुल गईं। सोसायटी के पेड़-पौधे जैसे....
