दया नंद पांडेय

भीगना 

सावन की शिवरात्रि है और कवि कालिदास के नगर में वह भीग रहा है। लाइन में लग कर भीग रहा है। अनायास और औचक। यह मनोहारी है। बारिश में भीगना उसे पसंद है। बेहद पसंद। बस भीगने के बाद होने वाले खांसी, जुकाम और बुखार से वह डरता है। बचपन में तो वह बारिश में भीगने पर मां से पिटता था। पर तब भी जब कभी बारिश होती तो किसी-न-किसी बहाने घर से निकल जाता बारिश में भीगने के लिए। तब मां पीटती थी, अब ख....

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