मनीषा मंजरी

एक दिवाली ऐसी भी

अमावस्या की उस रात में सारा शहर रोशनी की चमक-धमक से जगमगा रहा था। हर तरफ रोशनी से सजे-धजे घर और मुस्कराहट और खुशियों से दमकते चेहरे थे। दिवाली की आतिशबाजियां एक क्षण के लिए भी शहर को सूना नहीं होने दे रहीं थी। जहां एक ओर शाम होते ही लोगों के घरों में दिवाली की पूजा के शंख बज रहे थे, वहीं दूसरी ओर उसी शहर की एक गली में अवस्थित जीवन हॉस्पिटल के आई-सी-यू- में बीप-बीप की आवाज के साथ ....

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