यह सुबह का वक्त था। जब मैं तड़के मॉर्निंग वॉक के बाद घर पहुंचा था। उसके बाद करीब एक घंटा प्राणायाम किया-भजन सुनते हुए। रिटायर्ड लाइफ का यही तो आनंद होता है। आप अपनी मर्जी के मालिक होते हो। पहले आर्मी में था। सुबह छह बजे पीटी में जाना अनिवार्य होता था। पौने सात बजे तक वापस घर। फिर सुबह सवा आठ बजे ऑफिस जाने की भागमभाग। अब समय-ही-समय है। भगवती अभी भी सोई थी। अतः पूरे घर में ....
