किरण मिश्र

आलोचना की सार्थकता

समाज एवं सामाजिक परिस्थितियां जैसी होती हैं, वैसा ही प्रभाव मनुष्य के व्यक्तित्व पर पड़ता है। उसके भाव, विचार और उनको व्यक्त करने वाली शैली भी वैसी ही हो जाती है। इस बात को अक्षरशः सत्य होते हम वरिष्ठ आलोचक निर्मला जैन के साहित्य में देख सकते हैं। उनके लेखन में उनका शब्द-चयन, वाक्य-विन्यास देखते ही बनता है। कौशल के साथ भाषा का उपयोग करने की क्षमता ही नहीं वह वात्याचक्र के ....

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