अचला शर्मा

मैडम की खामोशी भी एक मुखर प्रतिक्रिया है

दाग देहलवी का एक शे’र हैµ
इक जमाना मिरी नजर में रहा
          इक जमाना नजर नहीं आता
दाग के इस शे’र को अक्सर उलट पलटकर देखती हूं, समझने की कोशिश करती हूं कि दाग की नजर से जो इक जमाना ओझल है, वह कौन-सा जमाना है? क्या उनका इशारा उस जमाने की तरफ है जो गुजर चुका है? यह सवाल इसलिए कि मेरे सामने है डॉ- निर्मला जैन की आत्मकथाµ‘जमाने में हम’।
कोई शख्स आत्मकथा क्यो....

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