रामेश्वर राय

मैडम निर्मला जैन: संकल्प और अपराजेयता का आकाशदीप

लगभग चालीस वर्षों की संबंध-यात्र को एक शिष्य के रूप में अपनी गुरु प्रोफेसर निर्मला जैन के बारे में जो भी कहूंगा, वह भोर के क्षितिज से बिंदी जितनी लाली या सागर की लहरों से उछली एक नन्हीं बूंद या हिमालय के धवल शिखरों के एक कण जितनी बर्फ जैसा ही होगा। हिंदू कॉलेज में हिंदी ऑनर्स तृतीय वर्ष में भारतीय काव्यशास्त्र पढ़ाते हुए गुरुवर कृष्णदत्त पालीवाल ने मैडम निर्मला जैन की कि....

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