एम.ए., एम.फिल. तथा पीएच.डी. के दौरान के अपने शिक्षकों को याद करता हूं तो मेरे भीतर चार नाम बहुत प्रमुखता से झलकते हैं। प्रोफेसर रामदरश मिश्र, प्रोफेसर निर्मला जैन, प्रोफेसर विश्वनाथ त्रिपाठी और प्रोफेसर नित्यानंद तिवारी। जब मैं एम.ए. में था तो दिल्ली विश्वविद्यालय की हिंदी साहित्य सभा का सचिव चुना गया था। त्रिपाठी जी सभा के शिक्षक प्रभारी थे। उस दौरान साहित्य सभा खूब सक्....
