डॉ. निर्मला जैन जैसी बड़ी शख्सियत पर लिखने के लाभ और हानि के पलड़े बराबर हैं। लाभ यह है कि उनके बहाने मैं अपने को भी प्रोजेक्ट कर सकता हूं। परसाई ने मुक्तिबोध पर संस्मरण लिखते समय इसे खतरा कहा था, पर साथ ही इसे सफल संस्मरण का गुण भी कहा था। मैं इसे गुण मानकर अपना लाभ ग्रहण कर रहा हूं। आप जिसके असीम प्रशंसक होते हैं, उस पर अपनी कहते समय, न चाहते हुए भी, अतिशयोक्तियाें का खिंचे ....
