बात उन दिनों की है, जब कथा-लेखन को थोड़ा विराम देकर मैं एक्टिव थिएटर की ओर मुड़ी थीµलगभग बीस साल बाद। कहानियां तब भी लिख ही रही थी, हिंदी और मैथिली दोनों में ही। लेकिन, थोड़ा कम। एक्टिव थिएटर की शुरुआत की थी अपने थिएटर गुरु श्री आरएस विकल के साथ जो तब मुंबई आ गए थे। नाटक चुना गया था डॉ- नरेंद्र मोहन लिखित ‘मि- जिन्ना’। दिल्ली में अरविंद गौड़ द्वारा इस नाटक को किया जाना था, जिस....
