निर्मला जैन को इतना जानने का मौका कि उनके विषय में कुछ लिख सकूं, उनकी जिन आत्मवृत्तांतपरक किताबों को पढ़ने से मिला बल्कि शिद्दत से यह महसूस हुआ कि वे भी आत्मसंघर्ष की कठिन आंच से गढ़ी हुई शख्सियत हैं, वे किताबें हैं, ‘दिल्ली: शहर दर शहर’ और ‘जमाने में हम’ के अलावा ‘कथा समय के तीन हमसफर भी’। इन किताबों में उनके व्यक्तित्व के आंतरिक पक्ष सहित वह परिदृश्य भी आया है खास....
