निर्मला जैन के बारे में लिखना इतना मुश्किल होगा मैंने सोचा भी नहीं था। सबसे पहले तो मैं उन्हें कब से जानता था या कितना जानता था? मैं सालों (या यूं कहें कि दशकों) से उन्हें जानता रहा था पर उनसे किसी करीबी रिश्ते का दावा नहीं कर सकता थे। गोष्ठियों या विभिन्न कार्यक्रमों में उनसे आमना-सामना होता रहता था, यहां तक कि वे मेरे गांव के पुस्तकालय भी एक कार्यक्रम में आई थीं पर उनसे ....
