उषा प्रियंवदा

निर्मला की मैत्री से मैं समृद्ध हुई

कुछ रिश्ते बनाने पड़ते हैं और एक बार बन जाते हैं तो दोनों ओर से उन्हें जीवन भर निभाना आसान नहीं होता, क्योंकि जीवन की राह पर चलते हुए तरह-तरह की बाधाएं आती रहती हैं। कभी-कभी मित्रें में अनबन हो जाती है। अगर एक आगे निकल गई और दूसरी को लगा कि मैं पीछे छूट गई हूं और उनमें स्पर्धा आ जाती है। मगर कुछ मैत्रियां या संबंध ऐसे होते हैं कि जो प्रथम परिचय से ऐसे बांध लेते हैं जो उम्र भर अप....

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