सर्वेश सिंह

सर्वेश सिंह की कविता

जेएनयू का शोक

उसकी कत्थई ईंटों की मिट्टी
कहते हैं कि गुरुग्राम की थी
जहां गुरु द्रोण का आश्रम था

आंचल में अरावली की झाडि़यां थीं
जहां कभी राय पिथौरा ने
शब्दबेधी धनुर्विद्या सीखी थी

सुनते यह भी हैं
कि जब जेएनयू बन रहा था
तब तक्षकों का एक महाभारतकालीन कुनबा
पुस्तकालय के नीचे
खुशी खुशी दफन हो ....

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