जीवन में रोमांच की निरंतरता बेहद जरूरी है अन्यथा उदासीनता चौतरफा पसरने लगती है, खुद के प्रति, समाज के प्रति और अंततः जीवन के प्रति। यह सबसे भयावह घटना है जो यदि घट गई तो समझ लेना चाहिए कि चलती सांसों के मध्य आप मुर्दा हो चले हैं। उदासीनता हर प्रकार से नकारात्मकता को जन्म देने, उसके फलने-फूलने का माध्यम है। इन दिनों, सच तो यह कि बीते कुछ बरसों से, इस उदासीनता ने मेरे भीतर स्थ....
