पंकज शर्मा

हिंदी लेखक को क्यों नहीं मिलता नोबेल प्राइज?

साहित्य का नोबेल प्राइज किसी हिंदी भाषा के लेखक को मिले, ऐसा आज तक नहीं हो पाया है। दर्दनाक यह है कि इसकी संभावना दूर-दूर तक दिखाई भी नहीं पड़ती है। ऐसा नहीं है कि हिंदी के लेखकों में दमखम नहीं है। पिछले सौ सालों में प्रेमचंद से लेकर निराला, मुक्तिबोध, अज्ञेय, निर्मल वर्मा, शमशेर और केदारनाथ सिंह तक नोबेल प्राइज के दावेदार हो सकते थे। आज भी हिंदी में लिखने वाले कई ऐसे जीनियस....

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