निधि अग्रवाल

भागते समय में छूटते रिश्तों का दर्द

‘विकास के चरमोत्कर्ष पर पहुंची सभ्यता अब तक मानवीय कहे जाने वाले रिश्ते नाते से पूरी तरह छूंछी हो चुकी है। मैंने कहा भी है कि सभ्यता आज जहां पहुंची है, शर्मिंदा है अपने आप पर। यह मनुष्य में से मनुष्यता का खारिज होते जाना ही मेरी कहानियों की दुखती रग है।’
सूर्यबाला द्वारा ‘बहनों का जलसा’ की भूमिका में कहे इन शब्दों के अनुरूप ही संग्रह की अधिकतर कहानियों में दो स....

Subscribe Now

पाखी वीडियो


दि संडे पोस्ट

पूछताछ करें