कौशल किशोर

‘देस’ की पड़ताल और आलोचना की नई राह

हिंदी आलोचना मुख्य तौर से कहानी व कविता पर केंद्रित रही है। उपन्यास को जीवन का महाकाव्य कहा गया है। साहित्य की अन्य विधाओं की तुलना में यह सर्वाधिक आधुनिक विधा है। हिंदी में तो राष्ट्रीय स्वाधीनता आंदोलन के दौरान यह सामने आई। इस विधा के मूल्यांकन में जिन चंद आलोचकों ने योगदान किया है, वीरेंद्र यादव उनमें अग्रणी हैं। ‘उपन्यास और देस’ इसका उदाहरण है। यह उनकी आलोचना ....

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