अश्विनी कुमार दुबे

गर्दिश की जमीन से आसमान के सितारे तक

30 अगस्त 1913 को एक हिंदू दलित परिवार में एक बच्चे का जन्म हुआ। जिस समाज में दलित परिवार में जन्म लेना ही आवारगी की पहचान हो और जिसे उपेक्षा की दृष्टि से देखा जाता हो, वहां कोई बालक बड़ा होकर अपनी आवारगी को प्रतिष्ठित करता है और फदृ से कहता हैµ‘हां, आवारा हूं/या गर्दिश में हूं आसमान का तारा हूं।
दलित परिवार में जन्म लेते ही किसी भी बालक को जिन विद्रूपताओं और विसंगतियों का ....

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