वो भी इसलिए कि उसके बुलेटिन की भाषा खासतौर पर कॉलेज के छात्र-छात्रओं और थोड़ी बहुत हिंदी समझने वाले अंग्रेजीदां लोगों को ध्यान में रखकर तैयार की गई थी। मसलन-आज पार्लियामेंट में अपोजीशन के लीडरों ने वॉकआउट किया---आदि। ऐसे में ज्यादातर लोग अब भी दूरदर्शन के समाचार से ही संतोष करते थे। बाद में आधे घंटे के आजतक ने टीवी न्यूज को एक नया कलेवर प्रदान किया। हालांकि तब दिल्ली मे....
