राजा सिंह

अंतर

वह सो रही थी। वह गहरी नींद में थी। आवाज सिसकती हुई, कानों में घुसती हुई झिंझोड़ती है। उस आवाज के साथ ही, वह उठ बैठी। चारों तरफ धुप्प अंधेरा था। उसने बेड पर टटोल कर देखा। न वो था न उसकी आवाज। कहां गया होगा अर्पित? शायद बाथरूम? वह कुछ देर वैसे ही बैठे-बैठे अंधेरे में प्रतीक्षा करती है। बेहद छनी हुई सिसकियों की आवाज बंद थी, फिर भी...! 
बिस्तर से उठकर बिजली का स्विच आन करती है। र....

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