उर्मिला शिरीष

विलोम

मेरा नाम नंदिता आचार्य है। आचार्य मेरा उपनाम है। न माता-पिता का दिया हुआ ना ससुराल का अपनाया हुआ। ऐसा नहीं है कि इस उपनाम को लेकर मुझे किसी ने रोका-टोका न हो। मार्कशीट्स और प्रमाण पत्रें में जब माता-पिता का नाम लिखा है तो शादी के बाद बदलाव क्यों? उत्तर मिला था क्योंकि शादी के बाद पति की वारिस पत्नी ही होती है। संपत्ति की वारिस। बैंक खातों की वारिस। बीमा पॉलिसियो....

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