वह अत्यंत शोक और क्षोभ का दिन था। तमाम ऐंकर-पत्रकार दुखी थे, आक्रोशित थे। चैनलों पर उनके सुदर्शन चेहरे लाल-पीले हो रहे थे। होने भी चाहिए थे। क्यों न हों? उनकी बिरादरी के लोगों के साथ ऐसा बर्ताव हो और वे स्थितप्रज्ञ बने रहें, ऐसा कैसे हो सकता था? ये तो किश्ती वहां डूबी, जहां पानी सबसे कम था, वाली बात हो रही थी। जिनसे उम्मीद थी, वही दगा दे रहा था। वही कह रहा था कि ये फ्र....
