मनुस्मृति शायद भारत की सबसे विवादास्पद पुस्तक है। इस पुस्तक को लेकर लोगों के बीच व्यापक मतभेद हैं। कुछ लोग इसे धर्मग्रंथ का दर्जा देते हैं तो दूसरे अधर्म और अन्याय का दस्तावेज बताते हैं। मैंने करीब पच्चीस वर्ष पहले मनुस्मृति को पढ़ा था। इसे पढ़कर मुझे लगा कि या तो यह पुस्तक असली मुनस्मृति नहीं है जिसे मैंने पढ़ा है अथवा वे व्यक्ति इंसान नहीं है जो इसका समर्थन करते हैं। ....
