“पिछले कई वर्षों से सैकड़ों शब्द, नाम, देश, समस्याएं और समाचार मेरे लिये बेमानी हो रहे हैं, होते जा रहे हैं, उनमें डेमोक्रेसी, चाइना, चुनाव, रेल-दुर्घटना, खाद्यान्न, भ्रष्टाचार, जनता, सत्यमेव जयते, कर्फ़्यू, फायरिंग, बाढ़-फ्लड, दहाड़, सूखा-जरी-सुखाड़ जैसी नित्य के समाचारों में इस्तेमाल होने वाले शब्द भी हैं जिनके बिना आजकल किसी का काम नहीं चल सकता… ‘फ्लड-बाढ़ दहाड़’ की तरह ‘ड....
