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धीरे-धीरे
बड़े होने के साथ ही
खुलती गई मुट्ठियां
हथों ने थाम लिये हाथ
संवर गया जीवन।
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बुरांस
हांलाकि
यह एक भरा-पूरा जनसमूह है
किंतु यहां भी
हर कोई अपने-अपने में अकेला
हर किसी के हैं कई-कई फाड़
क्यों करें
रात के दौरान
उसे नींद नहीं आती और
दिन में
वैसे भी कौन अपने में रहा है---
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