गजल

  • इस जहां से एकदिन तू भी हवा हो जाएगा

    आस्मां में छेद होगा दूर की यह बात है अब सियासत दिन को कह दे रात है तो रात है

    पूरा पढ़े

रचनाकार

पूछताछ करें