दिल से दिल की बात

  • तू दोस्त किसी का भी सितमगर

    ‘तू दोस्त किसी का भी सितमगर न हुआ था औरों पे है वो जुल्म कि मुझ पर न हुआ था।’ -ग़ालिब

    पूरा पढ़े

रचनाकार

पूछताछ करें