कृष्ण कल्पित

भुवनेश्वर मतवाला मंडल और साहित्यिक विवाद

‘जिंदगी से वह निपटारा कर चुका था, मौत उसे नहीं चाहती थी-पर वह तब भी समय के मुंह पर थूक कर जीवित था।’
अपनी अमर/अप्रतिम/हैरतअंगेज कहानी भेडि़ए में भुवनेश्वर ने उपरोक्त वाक्य खारू बंजारे के लिए लिखा था। लेकिन क्या यह एक वाक्य खुद भुवनेश्वर के बारे में नहीं है? जैसे हर महान कलाकृति में उसके रचनाकार की छवि हमें कभी धुंधली, कभी स्पष्ट या अस्पष्ट और कहीं-कहीं छिप....

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