आकांक्षा बरनवाल

आकांक्षा बरनवाल की तीन कविताएं

 मेरे ‘तुम’

बिना कुछ कहे, अंजुरी भर हरसिंगार
पहली मुलाकात में तुमने भेंट किए थे
और मैं उन अनकही बातों को
सहेज ली थी, उन फूलों के साथ
दिल के छोटे से कोटर में 

मैं उन पुष्पों के साथ
अंतहीन संवाद करती हूं
संवाद का हर शब्द
मिसमिसी से एहसास को लपेटे हुए
बेतकल्लफु होकर
तुम्हारे नाम का करता है आगाज
फिर भी आ....

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