अष्टभुजा शुक्ला

अष्टभुजा शुक्ला की पांच कविताएं

शब्द मुखबिर हैं तुम्हारे

झूठ जितने कपट सारे
छिपे मंसूबे तुम्हारे 
लाख पहनाओं इन्हें
पर मिलेंगे कपड़े उतारे
यही पकड़ाएंगे बंदे! 
शब्द मुखबिर है हमारे

बोल करके निकल जाओगे
न इस गफलत में रहना 
बांध सकते नहीं इनको 
छंद और तुकांत पहना 
जहां से निकले वहीं के
लिखे होंगे पते सारे 

किस ....

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