निशांत

कविता की कटार 

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कराह सुनकर भी/जो नहीं टूटे/नींद नहीं/वह मृत्यु है चाहे जितना भी/थका हो आदमी/और चाहे जब/सोया हो(मृत्यु)
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बहुत दिनों तक/जब गोरखपुर में/कोई अनहोनी नहीं होती/तो योगी के कानों में/स्वयं कुछ कहते हैं गुरु गोरखनाथ (गोरखपुर: तीन कविताएं)
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एक हाथ में पेप्सी-कोला/दूजे में कंडोम/तीजे में रामपुरिया चाकू/चौथ में हरिओम/कितना ललितललाम यार है/भारत घोड़े पर सवार है (भारत घो....

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