रामशरण जोशी

मुक्ति

‘क् या कहूं? सुनीता वर्मा नहीं रहीं--- उन्होंने खुदकुशी कर ली है---। यही सुनना चाहती है?’ एक ही सांस में उमा सिंह सब कुछ कह डालती है।
‘क्या---?’ सुकमी चुप हो जाती है और उमा सिंह के आंसू पोंछने लगती है। उमा उसे दूर करने की कोशिश करती है लेकिन सुकमी अपनी धुन में अपनी मालकिन को मनाती रहती है। वह दौड़कर पानी का गिलास लाती है। उमा सिंह अनमने मन से पानी पीती हैं। सुकमी अपने आप च....

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