नरेन सहाय

खिड़की के नीचे बारिश

1
धूप का एक टुकड़ा दीवार पर लगे पंख को उजास से भर रहा था। सात आसमान पार ले जाने वाली विस्मय-रोशनी लड़के को कोई जादुई धूप जान पड़ रही थी। उसे लगता कि इसके अंत का सिरा जरूर अंतरिक्ष में मिलता होगा। एक दोपहर एक किशोर जोड़ा अपनी-अपनी छतों से अपने-अपने हाथों में शीशे के टुकड़े लिए सीमेंट की दीवार पर उजली रोशनी के धब्बों को आपस में मिलाने का खेल रहे थे। कस के गले लगे दीवार की आकृ....

Subscribe Now

पूछताछ करें