संतोष कुशवाह

संतोष कुशवाह की पांच कविताएं

तुम्हारी हंसी

तुम्हारी हंसी ने
ये एहसास यह यकीन दिलाया है
कि इस बहरूपिया दुनिया में
अभी भी बची हैं
बहुत सारी चीजें ऐसी
जो बनावटी नहीं हैं
मिलावटी नहीं हैं
दरअसल खालिस हैं
और खालिस ही रहेंगी
बिलकुल तुम्हारी खालिस और खुलूस हंसी की तरह।

दाग अच्छे हैं

वो नेता  जी 
कई दंगों के मुख....

Subscribe Now

पूछताछ करें