धर्मपाल महेंद्र जैन

धर्मपाल महेंद्र जैन की छह कविताएं

अलविदा की शाम 

तुम्हारे जाने के बाद 
दिन ऐसा हुआ जैसे 
किनारे को थपेड़े मारकर 
लहर पानी में मिल गई
 
मदमस्त नाचती-गाती 
युवतियों का झुंड 
अपनी बस में बैठ गया
जाने के लिए 
    
संगीत के सुर तो उठे 
पर हवा में नमी बहुत थी
कोई धुआं छोड़ गया मेरे ऊपर
छल्ले बनाकर

सूरज की रोशनी में 
झि....

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