किरण अग्रवाल

किरण अग्रवाल की चार कविताएं

सपने के भीतर

जब आततायी घुसे आधी रात उसके घर में
मौत बरसाते हुए
वह सपने में था
सपना जो धीरे-धीरे अपने पंख पसार रहा था
उड़ान भरने के लिए
उन्होंने सबसे पहले उस सुकोमल सपने का कत्ल किया
फिर उसके परिवारजनों को मार दी गोली एक-एक करके
और पूरे घर को लगा दी आग
लेकिन वह बचा रह गया
मरे हुए सपने के भीतर दुबका हुआ
जैसे बची रह जाती है राख क....

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