रत्ना श्रीवास्तव

सरोकारों की नींव पर सृजन की प्राचीरें

संजीव हिंदी के जनवादी सरोकारों के प्रमुख कथाकार हैं। विषय वैविध्य और गहन विवेचनात्मक शैली उनके उपन्यासों और कहानियों के प्रमुख आकर्षण हैं। घटनाओं का सहज प्रवाह, पात्रनुकूल भाषा, चली आ रही परिपाटी और दोहराए जाते विषयों से विलग नवीन कथानक एवं सृजन को अभियान मानकर लिखना उनके सृजन की पहचान है।
संजीव ने अपनी कहानियों व उपन्यासों के माध्यम से लोकतांत्रिक मूल्यों के प्....

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