कुबेर कुमावत

बहुत-सी बातें उद्घाटित करना आत्मघात जैसा है 

साहित्य की आत्मजीवनपरक विधाओं के वर्ग में आने वाली डायरी यानी दैनंदिनी एक महत्वपूर्ण विधा है। जो व्यक्ति डायरी लिख रहा है उस व्यक्ति का निजी जीवन ही डायरी की मुख्य विषयवस्तु होती है। डायरी लिखना और वह भी एकदम सच्ची और नियमित डायरी लिखना इतना सरल काम नहीं है जितना कि लगता है। रोज यानी प्रतिदिन आपके जीवन में कुछ ऐसे होना अपेक्षित है जिसे लिखा जा सके या जिसे लिखने की जरूर....

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