पूनम सिंह

 निष्करुण समय का खुरदुरा यथार्थ 

तीक्ष्णप्रज्ञ पत्रकार एवं संवेदनशील कवि चंदन की अद्यतन काव्य कृति ‘गोयठा पाथती लड़की’ की अधिकांश कविताएं किसी छोटे से बिंदु से प्रारंभ होकर एक व्यापक अर्थबोध तक जाती है। विष्णु नागर ने इन कविताओं को सूत्र वाक्य में परिभाषित करते हुए लिखा है-‘चंदन की कविताओं में सबसे ध्यान खींचने वाला उनका स्वर वह है, जो हमारे समाज और समय की विषमताओं के बीच अति सामान्य जनों की जिज....

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