कृष्ण कल्पित

पंकज सिंह कविता को टकसाल में बदलने के पक्षधर नहीं थे

पंकज सिंह को कल रात/मैंने सपने में देखाए पार्थ! /युवा और घुंघराले बालों वाला पंकज/पेरिस से एकदम आया हुआ सा!/पंकज सिंह से पहले कोई हिंदी कविधपेरिस गया हो याद नहीं पड़ता/शायद नहीं/इन दिनों तो हर कुली-कबाड़ी/या तो पेरिस को जाता है/या पेरिस से आता हैए सार्त्र!
(कवि ने नहीं कहार: बाग-ए-बेदिल से)
पंकज सिंह से मेरी पहली मुलाकात 1977 में जयपुर में हुई थी-जब वे अल्पसमय के लिए राजस्थ....

Subscribe Now

पूछताछ करें