अरूणेन्द्र नाथ वर्मा

उनींदे नागरिकों को जगाने का अलार्म

उनींदे नागरिकों को जगाने का अलार्म

सहमति और आलोचना के स्वरों को कोमल बनाए रखना सबके बस की बात नहीं। ज्वलंत समकालीन समस्याओं का बेबाकी से विश्लेषण करना और निजी रुझान को पूरी तरह दरकिनार किए बिना भी विश्लेषण में संतुलन बनाए रखना विशेषता है प्रियदर्शन के लेखन की। सतह के नीचे वाली परत में उनका वामपंथी झुकाव छुपा नहीं रह पाता, फिर भी सशक्त शब्दों के ....

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