कृश्न चंदर

मेरी कुल कायनात यही झूठे सपने हैं

मेरी कुल कायनात यही झूठे सपने हैं

हर इंसान को आइने में अपनी सूरत अच्छी नजर आती है। न आए, तो वो आइना देखे ही क्यों? इसमें आइने का इतना कसूर नहीं है, जितना देखने वाले का। दरअसल, हर इंसान आइना देखते वक्त अपने अंदर से एक दूसरा आइना निकालकर, उसे पहले आइने में छुपाकर रख देता है। और उसमें अपनी सूरत देखता है। फिर यकायक दुनिया बदल जाती है। बच्चा, जवान हो जाता है....

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