विनीता परमार

ट्रांसलोकेट@82 सेंटीमीटर

खुद की बनाई पगडंडियों के सहारे चलने वाले छोटे से शहर में जब हाईवे की तरह यूं कह लो फोर लेन का प्रपोजल पास होने ही वाला था तब वो शहर आश्चर्य में था। अचानक से सड़क के किनारे जिनकी जमीन थी वे मुआवजे की रकम गिनना शुरू कर चुके थे। पैसे की मुटाई ने उस जगह के जुड़ाव के दिनों की मुटाई को कम कर दिया था। इस विस्थापन के दर्द को पैसे की गर्मी की सेकाई मिल गई थी, हालांकि कुछ बूढ़े-बुजुर्ग जगह ....

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